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बागी खेमे में शामिल होकर सुदीप बंद्योपाध्याय ने दिया परामर्श

'ममता अब केवल मार्गदर्शक और सलाहकार की भूमिका में रहें'

14 Jun 2026

बागी खेमे में शामिल होकर सुदीप बंद्योपाध्याय ने दिया परामर्श

कोलकाता। बंगाल की सियासत में मचे घमासान के बीच तृणमूल के सबसे कद्दावर और वरिष्ठ चेहरों में से एक, कोलकाता उत्तर से सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने आखिरकार अपनी खामोशी तोड़ दी है। लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाने वाले सुदीप ने अब खुलकर यह साफ कर दिया है कि आखिर किन परिस्थितियों और वजहों के चलते उन्हें बागी सांसदों के पाले में खड़ा होना पड़ा। सुदीप अब सांसद काकली घोष दस्तिदार के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बागी सांसदों का यह पूरा धड़ा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर एनडीए को समर्थन देने की औपचारिक और कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए दिल्ली स्थित बंग भवन में एकजुट हुआ। 
पत्रकारों से बेहद बेबाकी से बात करते हुए सुदीप ने बताया कि पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो सांगठनिक बदलाव चाहता है। उन्होंने कहा कि तृणमूल के अधिकांश सांसदों और विधायकों की यह दिली इच्छा है कि ममता बनर्जी अब पार्टी की मुख्य मार्गदर्शक और प्रमुख सलाहकार की भूमिका में आ जाएं, ताकि नए नेतृत्व को मौका मिल सके। सुदीप ने स्वीकार किया कि जमीन पर काम कर रहे जनप्रतिनिधियों की इसी गहरी भावना और आंतरिक आवाज ने उन्हें प्रभावित किया और वे खुद को इस खेमे के करीब आने से नहीं रोक पाए। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला किसी निजी स्वार्थ में नहीं, बल्कि सहयोगियों की भावना का सम्मान करने के लिए लिया गया है।
चूंकि सुदीप बागी सांसदों के इस पूरे कुनबे में सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, इसलिए राजनीतिक गलियारों में यह कयास तेजी से लगाए जा रहे थे कि इस नए राजनीतिक मोर्चे की कमान वही संभालेंगे। हालांकि, इन अटकलों पर विराम लगाते हुए सुदीप ने स्पष्ट किया कि उनकी किसी भी तरह का नेता बनने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। उन्होंने इस मुहिम का श्रेय देते हुए कहा कि काकली घोष दस्तिदार ने शुरू से ही इस पूरी राजनीतिक पहल में बेहद सक्रिय और आक्रामक भूमिका निभाई है। चारों तरफ से साथी सांसदों और विधायकों का लगातार अनुरोध और भारी दबाव आ रहा था, जिसके चलते वे अंतत: इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए तैयार हुए।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई अपनी बहुचर्चित मुलाकात पर भी सुदीप ने खुलकर पत्ते खोले। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह शिष्टाचार भेंट महज दस मिनट की होगी, लेकिन देश के गृह मंत्री के साथ बंगाल के राजनीतिक हालात पर चर्चा इतनी गंभीर थी कि यह बैठक लगभग एक घंटे तक खिंच गई। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे जाने वाले समर्थन पत्र पर अपने दस्तखत को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने एक बड़ा सस्पेंस कायम रखा। सुदीप ने दावा किया कि उन्होंने अभी तक उस पत्र पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने शुभेंदु अधिकारी को आश्वस्त किया है कि जैसे ही वह दिल्ली पहुंचेंगे, वे उनके सामने ही हस्ताक्षर करेंगे। 
इसी बीच दिल्ली का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर बागी सांसदों की एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक देर रात तक चलती रही। 
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सायनी घोष, प्रसून बंद्योपाध्याय समेत तृणमूल के कई दिग्गज बागी सांसद पहुंचे, जबकि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की मौजूदगी ने भी इस बैठक के सियासी मायनों को और पुख्ता कर दिया। राजनीतिक हलकों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान इस बैठक में भले ही शामिल नहीं हुए, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष से होने वाली औपचारिक मुलाकात के दौरान वे बागी गुट के साथ खड़े नजर आएंगे। बंगाल की बिसात पर तेजी से बदलते इन समीकरणों के बीच सुदीप बंद्योपाध्याय का यह खुला विद्रोह ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के वजूद के लिए अब तक का सबसे घातक राजनीतिक झटका साबित होने जा रहा है। 

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